अनादि न्यूज़ डॉट कॉम ,नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने 27 मार्च को बनी अपनी नई कैबिनेट के मंत्रियों की संख्या वरीयता में विस्तार किया हैं. अपनी कैबिनेट में दो मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी संभालने वाले प्रधानमंत्री शाह ने दो नए मंत्रियों की नियुक्ति की है. नेपाल के राष्ट्रपति भवन द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक यह नियुक्तियां प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह की सिफारिश पर हुई हैं. नए मंत्रियों के रूप में रामजी यादव और गौरी यादव को शामिल किया गया है.
इनमें रामजी यादव को श्रम व रोजगार मंत्रालय और गौरी यादव को उद्योग, वाणिज्य तथा आपूर्ति मंत्रालय की जिम्मेदारी देने की बात जानकारी दी गई है. रामजी यादव सप्तरी क्षेत्र नंबर 2 से निर्वाचित सांसद हैं, जबकि गौरी कुमारी यादव महोत्तरी क्षेत्र नंबर 4 से निर्वाचित सांसद हैं. खबर है कि, नए मंत्रियों का शपथग्रहण आज शुक्रवार को ही राष्ट्रपति भवन में कराया जायेगा, इसके लिए तैयारियां भी जोरों पर है.
स्वयं बालेन शाह संभाल रहे थे उद्योग मंत्रालय की जिम्मेदारी
बता दें कि, इससे पहले प्रधानमंत्री शाह खुद उद्योग मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे थे. ऐसे में इस विभाग को अलग मंत्री के हाथों सौंपकर सरकार के भीतर कार्य विभाजन को संतुलित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कैबिनेट विस्तार सरकार की रणनीतिक मजबूती और विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया गया है.
आने वाले समय में इन नियुक्तियों का असर सरकार की नीतियों और फैसलों में भी देखने को मिल सकता है. इससे पहले बालेन शाह सरकार ने अपने मंत्रियों के बैठने और प्रोटोकॉल के क्रम को बदल दिया था. मंत्रियों की रैंकिंग उनकी वरिष्ठता के आधार पर तय की गई थी.
कैबिनेट की मौजूदा स्थिति
अभी मौजूदा समय में नेपाल की 15 सदस्यीय कैबिनेट में फिलहाल श्रम, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा मंत्री दीपक कुमार साह सबसे निचले यानी 15वें पायदान पर हैं. बालेन शाह ने मार्च की शुरुआत में नेपाल के 47वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली थी. राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई थी. उस समय शपथ ग्रहण समारोह में उपराष्ट्रपति राम सहाय प्रसाद यादव, मुख्य न्यायाधीश प्रकाश मान सिंह राउत और कई पूर्व प्रधानमंत्रियों समेत वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे थे. नेपाल में बालेन शाह के नेतृत्व में बनी इस सरकार के इस कदम को शक्ति संतुलन के रूप में देखा जा रहा है.






