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न्याय न मिलने से हताश ग्रामीण ने की आत्मदाह की कोशिश, कलेक्ट्रेट में अफरा-तफरी।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, शीतलाल अचानक कलेक्ट्रेट परिसर में पहुँचा और खुद पर मिट्टी तेल उड़ेलकर आग लगाने की कोशिश करने लगा। यह देख वहाँ मौजूद अधिकारी, कर्मचारी और आम नागरिक सन्न रह गए। तत्काल हरकत में आई पुलिस ने उसे रोककर सुरक्षित किया। इस दौरान वह हल्का झुलस गया, जिसे बाद में उपचार के लिए जिला अस्पताल भेजा गया, जहाँ उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है।

बताया जा रहा है कि शीतलाल लंबे समय से अपने गाँव में कथित सामाजिक बहिष्कार का सामना कर रहा था। उसने आरोप लगाया है कि कुछ प्रभावशाली लोगों ने उसे और उसके परिवार को सामाजिक रूप से अलग-थलग कर दिया, जिससे उसके बच्चों की पढ़ाई और परिवार की रोज़मर्रा की ज़िंदगी प्रभावित हो रही है।

पीड़ित का कहना है कि उसने इस मामले में स्थानीय थाना, कलेक्टर कार्यालय, गृह विभाग और मानवाधिकार आयोग तक शिकायतें कीं, लेकिन कहीं से भी ठोस कार्रवाई नहीं हुई। न्याय न मिलने और लगातार मानसिक दबाव के चलते उसने यह कदम उठाने का प्रयास किया।

घटना के बाद पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी है। वहीं जिला प्रशासन ने भी शिकायतों की पुनः समीक्षा करने की बात कही है। इस घटना ने एक बार फिर प्रशासनिक संवेदनशीलता, ग्रामीण इलाकों में सामाजिक बहिष्कार और न्याय तक आम नागरिक की पहुँच पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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