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अमेरिका से वार्ता विफल, ईरान बोला—सरेंडर की शर्तें मंजूर नहीं

 

बता दें कि अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में एक अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने 11 अप्रैल 2026 को पाकिस्तान में शीर्ष ईरानी वार्ताकारों के साथ आमने-सामने की वार्ता शुरू हुई थी। इस बातचीत का उद्देश्य पश्चिम एशिया में जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए एक स्थायी शांति समझौते पर पहुंचना था। पाकिस्तान की मध्यस्थता से हो रही यह वार्ता 1979 में ईरान में हुई इस्लामी क्रांति के बाद दोनों पक्षों के बीच पहली प्रत्यक्ष, उच्चस्तरीय बातचीत के तौर पर देखी जा रही थी। हालांकि बातचीत फेल हो गई।

बातचीत फेल होने के बाद अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस अपनी टीम के साथ अमेरिका के लिए रवाना हो गए हैं। अमेरिका रवाना होने से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस कर वेंस ने कहा कि बुरी खबर यह है कि हम किसी समझौते पर नहीं पहुंच पाए हैं। मुझे लगता है कि यह अमेरिका के लिए बुरी खबर से कहीं ज्यादा ईरान के लिए बुरी खबर है। इसलिए, हम बिना किसी समझौते के अमेरिका लौट रहे हैं। उन्होंने हमारी शर्तें मानने से इनकार कर दिया है।

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अमेरिका ने अपनी ‘रेड लाइन्स’ स्पष्ट कीः वेंस

वेंस ने कहा कि उन्होंने अपनी ओर से “फाइनल और बेस्ट ऑफर” पेश कर दिया है, लेकिन ईरान ने फिलहाल अमेरिकी शर्तों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। वेंस ने कड़े लहजे में कहा कि अमेरिका ने अपनी ‘रेड लाइन्स’ स्पष्ट कर दी हैं। उन्होंने कहा, ‘हमने साफ कर दिया है कि हम किन चीजों पर समझौता कर सकते हैं और किन पर बिल्कुल नहीं. ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने हमारी शर्तों को स्वीकार नहीं करने का विकल्प चुना है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने कहा कि मुख्य अड़चन ईरान का अपने परमाणु कार्यक्रम को छोड़ने से इनकार करना था। उन्होंने कहा ‘हम यहां से एक बहुत ही सरल प्रस्ताव, एक समझौता प्रक्रिया के साथ जा रहे हैं, जो हमारा अंतिम और सर्वोत्तम प्रस्ताव है. हम देखेंगे कि ईरानी इसे स्वीकार करते हैं या नहीं।

इस्लामाबाद में कड़ी सुरक्षा का था इंतजाम

वार्ता से पहले इस्लामाबाद में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी और पूरे क्षेत्र में रेड अलर्ट घोषित किया गया था। अधिकारियों के अनुसार, 10,000 से अधिक पुलिस और सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया गए थे। रेड ज़ोन, जहां महत्वपूर्ण इमारतें हैं, सेना और रेंजर्स की सुरक्षा में है और वहां केवल अधिकृत लोगों को ही प्रवेश की अनुमति थी। ईरान-अमेरिका वार्ता पर पूरी दुनिया की नजर थी। हालांकि, अब इसके फेल होने से मिडिल ईस्ट में जंग का दायरा बढ़ने की आशंका है।