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क्या है गणपति बप्पा मोरया का मतलब? क्या है इसके पीछे की कहानी? पढ़ें पूरी खबर

अनादि न्यूज़ डॉट कॉम, धर्म-समाज। Ganpati Bappa Morya meaning: पूरे देश में गणेश चतुर्थी का पर्व पूरे धूम-धाम से मनाया जा रहा है। आज से प्रारंभ हुआ गणेशोत्सव पूरे दस दिन चलेगा। चारों ओर ‘गणपति बप्पा मोरया, मंगलमूर्ति मोरया’ के ही जयकारे सुनाई दे रहे हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि ‘गणपति बप्पा मोरया’ में ‘मोरया’ का क्या अर्थ है?, अधिकांश लोगों के मन में ये भ्रम है कि ये मोर्यवंश का सूचक है लेकिन नहीं इस शब्द का मौर्य वंश से कोई लेना-देना नहीं है। बल्कि ये नाम है उस व्यक्ति का, जो कि गणपति का बहुत बड़ा भक्त था। पौराणिक कथाओं के मुताबिक 14वीं शताब्दी के बहुत बड़े संत का नाम मोरया गोसावी था, उनके माता-पिता ने गणपति की काफी अराधना की थी।

गणेश जी ने सपने में दर्शन दिया

जिसके बाद उनका जन्म हुआ था, वो बचपन से ही गणेश जी की पूजा किया करते थे, वो हर साल पदयात्रा करके गणेश चतुर्थी के पर्व पर मोरेगांव बप्पा के दर्शन के लिए आते थे लेकिन जब वो बूढ़े हो गए तो उन्हें चलने फिरने में काफी दिक्कत होने लग गई, एक बार की बात है कि चतुर्थी के ठीक पहले उन्हें गणेश जी ने सपने में दर्शन दिया, जिसमें उन्होंने कहा कि आज सुबह मेरी मूर्ति नदी में स्नान करते वक्त मिलेगी।

‘गणपति बप्पा मोरया, मंगलमूर्ति मोरया’

और सुबह ठीक वैसा ही हुआ। इसके बाद तो संत मोरया गोसावी के चर्चे दूर-दूर होने लग गए। लोग उनके पास अपनी समस्या लेकर आते थे जिसका वो समाधान बताते थे। लोग उनके पैरों को छूकर मोरया बोलते थे , जिसके जवाब में मोरया उन्हें मंगलमूर्ति कहा करते थे और तब से ही ‘गणपति बप्पा मोरया, मंगलमूर्ति मोरया’ लोगों का उद्घोष बन गया जो कि प्रेम और तपस्या का भी पर्याय है।

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‘गणपति बप्पा मोरया’

चलन में आ गया माना ये भी जाता है कि गणपति ने संत मोरया को कहा था कि उनका नाम मेरे सात हमेशा जुड़ा रहेगा और इसी वजह से ‘गणपति बप्पा मोरया’ चलन में आ गया।