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जजों को बंधक बनाने पर SC की फटकार, CBI/NIA जांच को मंजूरी।

अनादि न्यूज़ डॉट कॉम , : पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर (SIR) का काम कर रहे 7 जजों को बंधक बनाने पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए नाराजगी जाहिर की है। मामले पर सुनवाई करते गुए सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत (CJI Justice Surya Kant) ने राज्य की ममता बनर्जी सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए बंगाल में सेंट्रल फोर्स तैनात करने के निर्देश दिए है। साथ ही मामले की जांच CBI या NIA से कराने की अनुमति दी है। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि इस तरह की हरकत किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता है।

बता दें कि पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 (West Bengal Assembly Elections 2026) काफी करीब है। ऐसे में बंगाल में SIR हटाने का विरोध हिंसक होता जा रहा है। स्थिति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मालदा में 7 न्यायिक अधिकारियों को 8 घंटे तक घेर लिया और  और उन्हें वहां से जाने नहीं दिया। काफी मशक्त के बाद पुलिस 7 इलेक्शन ऑर्ब्जवर (न्यायिक अधिकारी) को मुक्त करा सकी थी।

मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त टिप्पणी करते हुए कहा है कि दुर्भाग्य से आपके राज्य में हर अधिकारी राजनीतिक भाषा बोलता है। क्या आप समझते हैं कि हम नहीं जानते कि उपद्रवी कौन थे। कोर्ट ने चुनाव आयोग को सख्त आदेश दिया है कि वह न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय बलों को तैनात करे। सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर के दौरान बंगाल की वोटर लिस्ट से बाहर किए गए करीब 50 लाख लोगों की आपत्तियों और दावों की जांच के काम में जिला और सेशन जजों को लगाया है। बुधवार (1 अप्रैल, 2026) को यहां प्रदर्शनकारियों ने उन पर हमला कर दिया. कोर्ट ने इस मामले में संज्ञान लिया है और घटना पर नाराजगी जताई है।

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मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचौली की बेंच ने मामले पर संज्ञान लिया। कल दोपहर से रात तक प्रदर्शनकारियों ने न्यायिक अधिकारियों को बंधक बना कर रखा और जब रात को वह निकल कर जाने लगे तो उनके वाहनों पर पत्थर और लाठियों से हमला किया गया. कोर्ट ने इस घटना पर गंभीर संज्ञान लिया। कोर्ट ने चुनाव आयोग को आदेश दिया है कि जहां भी ये अधिकारी रुके हैं, वहां भी सुरक्षा दी जाए। अगर जरूरी हो तो परिवार के सदस्यों को भी सुरक्षा दी जाए। चुनाव आयोग जरूरत के मुताबिक कदम उठाए और राज्य सरकार आयोग के निर्देशों के मुताबिक काम करे। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में यह भी कहा है कि जहां दावों का निपटारा हो रहा है, वहां एक बार में 5 से ज्यादा लोगों को जमा न होने दिया जाए। बेंच ने मुख्य सचिव, डीजीपी, डीएम और एसपी को कारण बताओ नोटिस कर कहा है कि वह बताएं कि उनके विरुद्ध कार्रवाई क्यों न हो।

6 अप्रैल को होगी मामले की ऑनलाइन सुनवाई

कोर्ट ने इन अधिकारियों को यह भी आदेश दिया है कि वह 6 अप्रैल को ऑनलाइन सुनवाई में मौजूद रहें। कोर्ट ने चुनाव आयोग को घटना की जांच निष्पक्ष एजेंसी से करवाने को कहा है। यह एजेंसी CBI या NIA हो सकती है. जांच करने वाली एजेंसी को अपनी रिपोर्ट सीधे सुप्रीम कोर्ट को सौंपने का भी आदेश दिया गया है। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने पश्चिम बंगाल के एडवोकेट जनरल को फटकार लगाई है और कहा है, ‘दुर्भाग्य से आपके राज्य में हर अधिकारी राजनीतिक भाषा बोलता है। क्या आप समझते हैं कि हम नहीं जानते कि उपद्रवी कौन थे? मैं रात 2 बजे तक स्थिति की जानकारी ले रहा था।

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कपिल सिब्बल ने बंगाल SIR मामले को कोर्ट के सामने रखा

पश्चिम बंगाल SIR मामले को वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट के सामने रखा। उन्होंने कहा कि मुझे अभी टेलीग्राफ से एक रिपोर्ट मिली है। इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि मैं इसे राजनीतिक रंग नहीं देना चाहता। लेकिन हमें सुबह 2 बजे से ही रिपोर्ट मिल रही थी। यहां शाम 5 बजे उन्होंने अधिकारियों का घेराव किया और रात 11 बजे तक वहां कोई नहीं था। सिब्बल ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है।