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जवाहर बाजार निर्माण में गड़बड़ियों की हो जांच

अनादि न्यूज़ डॉट कॉम, रायपुर। नगर निगम में कांग्रेस के कार्यकाल में तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष रही और वर्तमान महापौर मीनल चौबे ने नक्शा के विपरीत बनने वाले जवाहर बाजार का पुरजोर विरोध किया था, जवाहर बाजार अपने निर्माण के साथ ही विवादों में रहा है। इसे जोर जबरदस्ती बाजार भी कहा जाता है। जिसमें तत्कालीन महापौर ने नियम कायदे कानून को ताक में रखकर सिर्फ और सिर्फ अपने फायदे पर जोर दिया। जवाहर बाजार निर्माण के समय सामान्य सभा की बैठक में निगम के पटल पर तत्कालीन नेता विपक्ष रही वर्तमान महापौर मीनल चौबे ने जमकर मामले को उठाया था और एमआईसी में बहुमत का दबाव होने के कारण नेता प्रतिपक्ष की आवाज जवाहर मार्केट के नक्शे के विपरीत निर्माण को रोक नहीं सकी ।

उक्त निर्माण का प्रस्ताव पहले से पारित होने के बाद संबंधित विभाग में लेआउट एप्रूव्ड होने के बाद तत्काल डाउनलोड कंट्री प्लानिंग और शासन से अनुमोदन होने हेतु जवाहर मार्केट के संपूर्ण नक्शे को टाउन एंड कंट्री प्लानिंग ने प्रस्ताव के आधार पर और गुण दोष को देखकर सभी प्रकार के सामान्य जनता के आवागमन और पार्किंग व्यवस्था को सम्मिलित करते हुए नक्शे को पारित किया था । उसके उपरांत नक्शे के विपरीत निर्माण पूर्व महापौर ने अपनी राजनीतिक रसूख का उपयोग करते हुए किया, होना बताया जा रहा है सीढिय़ा और एक्सीलरेटर का नक्शे में होना अनिवार्य था इसलिए जनता की सुविधा सुगमता से माल मार्केट के अनुसार बनाई जाती है । जिससे प्रथम तल में पार्किंग और ऊपर के सभी तलों में आवागमन के लिए रास्ता लगातार मिलते रहे और मार्केट की गरिमा और मार्केट की वैल्यूएशन कम ना हो। लेकिन सीढिय़ां और एसक्सीलेटर का निर्माण नहीं कर वहां पर दुकान बनाकर अपने ही रिश्तेदारों को आवंटित कर दिया। यह राजधानी की जनता की गाढ़ी कमाई पर सीधा सीधा डाका है, अक्ष य अपराध है। जनता के पैसों की बर्बादी करने का अपराध शासन को भारी नुकसान पहुंचाने जैसा आर्थिकअपराध है। जवाहर बाजार का शुरू से ही भारी भरकम विरोध रहा है। वहां के दुकानदारों के विरोध के बावजूद जनता के टैक्स की गाढ़ी कमाई को अपने परिवार के लिए निगम का पैसा बर्बाद हुआ ।

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अब समय बदला है भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे पूर्व महापौर को चुनाव में भारी हार का सामना करना पड़ा और यहां तक की कांग्रेस पार्टी भी प्रदेश की सत्ता से बाहर हो गई। अब जवाहर बाजार में हुए भारी भरकम भ्रष्टाचार औऱ मनमानी की जांच रिटार्यड जज से करानी चाहिए। जवाहर मार्केट में जांच करने में किसी को रुकावट नहीं होनी चाहिए। जिसने निगम की सत्ता में रहते हुए बड़े भ्रष्टाचार के घोटाले को उजागर करने के बजाय छुपाने के लिए साजिश करते रहे। इस वक्त नगर निगम में मीनल चौबे महापौर है और अब गंभीरता से जवाहर मार्केट में हुए भ्रष्टाचार की जांच होने की उ मीद जगी है। वहीं दूसरी ओर स्मार्ट सिटी की संपूर्ण भ्रष्टाचार की फाइलें जांच प्रतिवेदन शासन स्तर में अग्रिम कार्रवाई हेतु इंतजार कर रहा है। जनता की गाढ़ी मेहनत की कमाई जो निगम जनता के टैक्स वसूलती है उन पैसों को बेवजह फिजुल में उड़ाया गया । जिसकी इससे ज्यादा और क्या दुर्गति हो सकती है तस्वीरें बयां करती है।