1. जयपुर का ‘कंपटीमार शंकरिया’ – हथौड़े से मौत का सौदागर
1977–78 में राजस्थान की गुलाबी नगरी जयपुर दहशत से कांप उठी। लोग सड़कों पर निकलने से डरते थे। वजह था कंपटीमार शंकरिया—जिसे बाद में भारत का पहला बड़ा सीरियल किलर कहा गया।
शंकरिया का तरीका बेहद खौफ़नाक था। वह राह चलते लोगों पर पीछे से हमला करता और हथौड़े से उनके सिर पर वार कर उनकी हत्या कर देता। उसके शिकार अधिकतर अकेले पैदल यात्री होते। पुलिस के रिकॉर्ड के अनुसार, उसने लगभग 70 लोगों की हत्या कर दी।
1979 में कोर्ट ने उसे दोषी पाया और फांसी की सजा सुनाई। फांसी से ठीक पहले उसने कहा—
“मैंने व्यर्थ हत्या की है, इसका कोई लाभ नहीं मिला।”
2. कर्नाटक की ‘साइनाइड मल्लिका’ – मौत को प्रसाद बनाकर परोसा
1999 से 2007 के बीच दक्षिण भारत की धार्मिक नगरीयां ‘साइनाइड मल्लिका’ से दहल उठीं। असली नाम – के.डी. केम्पम्मा।
वह मंदिरों में साध्वी और भक्त महिला बनकर जाती। भोली-भाली महिलाओं से कहती कि उनके कष्ट दूर करने के लिए विशेष पूजा करनी होगी। पूजा के बहाने उन्हें प्रसाद या ‘पवित्र जल’ में साइनाइड मिला कर पिलाती, जिससे उनकी वहीं मौत हो जाती। इसके बाद वह उनके आभूषण लूट लेती।
पुलिस जांच में साबित हुआ कि मल्लिका ने कम से कम छह महिलाओं की हत्या की। अदालत ने पहले मौत की सजा सुनाई, लेकिन बाद में उसे उम्रकैद में बदल दिया गया। आज भी वह जेल में है और उसे भारत की पहली महिला सीरियल किलर माना जाता है।
3. ‘डॉ. डेथ’ देवेंद्र शर्मा – नहरों में फेंके गए शव
2002 से 2004 के बीच दिल्ली-हरियाणा बॉर्डर पर रहस्यमयी तरीके से टैक्सी और ट्रक ड्राइवर गायब होने लगे। जांच में सामने आया कि इसके पीछे है आयुर्वेदिक डॉक्टर देवेंद्र शर्मा, जिसे लोग बाद में ‘डॉ. डेथ’ कहने लगे।
शर्मा टैक्सी चालकों को बुलाता, उन्हें मार देता और गाड़ियां बेच देता। सबसे खौफ़नाक बात यह कि वह शवों को मगरमच्छों से भरी नहर में फेंक देता था। माना जाता है कि उसने 50 से 100 हत्याएं कीं।
2004 में उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई। बाद में एक केस में डेथ सेंटेंस भी दिया गया। लेकिन 2020 में पैरोल पर बाहर आया और फिर से पकड़ा गया। उसका केस अब भी भारतीय न्याय व्यवस्था की जटिलता का उदाहरण है।
4. निठारी हत्याकांड – बच्चों की चीखें और खोपड़ियों का राज़
2005–2006 में नोएडा के निठारी गांव से बच्चों के गायब होने की घटनाएं बढ़ीं। पुलिस जांच ने पूरे देश को हिला कर रख दिया।
व्यवसायी मोनिंदर सिंह पांधर और उसका नौकर सुरिंदर कोली—इन दोनों पर आरोप लगा कि उन्होंने मासूम बच्चों का अपहरण किया, बलात्कार किया, हत्या की और उनके शरीर के टुकड़े कर पीछे के नाले में फेंक दिए। जब पुलिस ने उनके घर के पीछे से मानव खोपड़ियां और हड्डियां बरामद कीं, तो पूरा देश सन्न रह गया।
कई साल तक चले मुकदमे के बाद 2017 में कोर्ट ने दोनों को फांसी की सजा सुनाई। यह मामला भारत के सबसे जघन्य अपराधों में गिना जाता है।
5. केरल का ‘रिप्पर चंद्रन’ – हथौड़े की दहशत
1985–86 में केरल की सड़कों और रेलवे ट्रैक के किनारे कई शव मिले। सबकी मौत का तरीका एक जैसा—हथौड़े से सिर पर हमला।
पुलिस जांच में सामने आया कि अपराधी है रिप्पर चंद्रन, जिसने 14 लोगों की हत्या की। अदालत ने उसे 1987 में मौत की सजा सुनाई और 1991 में उसे फांसी पर लटका दिया गया। यह केरल में दी गई अंतिम फांसी थी।
6. ‘साइको शंकर’ – महिलाओं का खौफ़
2008 से 2011 के बीच कर्नाटक और तमिलनाडु की महिलाएं खौफ के साए में जी रही थीं। वजह था एम. जयशंकर, जिसे बाद में ‘साइको शंकर’ कहा गया।
शंकर पर आरोप था कि उसने कम से कम 19 महिलाओं का बलात्कार और हत्या की। पुलिस ने कई बार उसे पकड़ा, लेकिन वह जेल से भागने में कामयाब रहा। आखिरकार 2018 में जेल के भीतर ही उसने आत्महत्या कर ली।
7. रजा कोलंदर – खोपड़ी संग्रहकर्ता
उत्तर प्रदेश का रहने वाला रजा कोलंदर एक पत्रकार की हत्या के बाद सुर्खियों में आया। उसकी आदत थी शिकार की खोपड़ी को जमा करना। पुलिस ने जब उसके घर से खोपड़ियां बरामद कीं, तो वह मामला पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया।
2000 में किए गए अपराध के लिए 2024 में उसे आजीवन कारावास और जुर्माना सुनाया गया। अदालत ने कहा कि अपराध घृणित है, लेकिन ‘rarest of rare’ श्रेणी में नहीं आता।