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रावतपुरा में डिग्री बेचने का खेल, मेडिकल शिक्षा का निकाला तेल

अनादि न्यूज़ डॉट कॉम, रायपुर। नवा रायपुर स्थित रावतपुरा निजी मेडिकल कॉलेज को मान्यता देने के लिए रिश्वतखोरी के मामले की सीबीआई गहन जांच कर रही है।सूत्रों के अनुसार राज्य सरकार भी कॉलेज की मान्यता निरस्त करने के लिए एनएमसी को चिट्ठी भेज सकती है। यही नहीं, सीबीआई की जांच के घेरे में आए मेकाहारा के प्रोफेसर पर भी सरकार कार्रवाई करेगी। साथ ही इस घुसखोरी कांड में संलिप्त लोगों को भी दबोचने की तैयारी है। इस विवि में सभी ऊपर से नीचे तक अधिकारी से लेकर संचालक तक घूस लेने में पीछे नहीं है। ईओडब्ल्यू ने जिन 35 लोगों खिलाफ एफआईआर किया था उसमें से 22 को सरकार निलंबित कर चुकी है।

सीबीआई ने रावतपुरा मेडिकल कॉलेज के चेयरमैन रावतपुरा महाराज समेत पांच लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया है। इनमें कालेज के डायरेक्टर अतुल तिवारी भी हैं, जो कि मान्यता के लिए रिश्वत देने के मामले में जेल में हैं। सीबीआई ने रेरा के चेयरमैन संजय शुक्ला, और रायपुर मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर डॉ अतिन कुंडू के खिलाफ भी एफआईआर किया है। सीबीआई की कार्रवाई के बाद राज्य सरकार भी हरकत में आई है। चिकित्सा शिक्षा संचालनालय ने डॉ अतिन कुंडू के रिकॉर्ड खंगाले हैं। यह पता चला है कि रावतपुरा संस्थान में भी सेवाएं दे रहे थे, और वेतन भी ले रहे थे। यही नहीं, पांच साल पहले भी अतिन कुंडू के खिलाफ इसी तरह की शिकायत आई थी। उनका तबादला अंबिकापुर हुआ, लेकिन वो नहीं गए। उस अवकाश पर थे, और रायपुर के एक अन्य निजी मेडिकल संस्थान रिम्स में सेवाएं देते रहे। इन तमाम बिन्दुओं पर उन्हें नोटिस देकर जवाब मांगा गया है। साथ ही सरकार रावतपुरा मेडिकल कॉलेज की मान्यता निरस्त करने के एनएमसी को चि_ी लिखने जा रही है। इसको सारे रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। बहरहाल, आने वाले दिनों रावतपुरा संस्थान पर शिकंजा और कस सकता है।

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मेडिकल कॉलेजों को फीस, स्टाइपेंड अब सार्वजनिक करना होगा: एनएमसी

नेशनल मेडिकल कमीशन (एन?एमसी) ने देश के सभी सरकारी, निजी और डीम्ड विश्वविद्यालयों को आदेश दिया है कि वे अपने संस्थानों की कोर्सवार फीस और इंटर्न, जूनियर रेजिडेंट और सीनियर रेजिडेट को दिए जाने वाले स्टाइपेंड की पूरी जानकारी अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक करें। हाल में हुई सीबीआई की छापेमारी और निर्धारित फीस से अधिक वसूली के देश भर से हो रहे खुलासे के बीच यह आदेश दिया है। यह निर्देश ऐसे समय में भी दिया हैजब सुप्रीम कोर्ट ने दो अलग अलग फैसलों में मेडिकल कॉलेजों द्वारा फीस छिपाने और इंटर्नशिप में स्टाइपेंड न देने को लेकर चिंता जाहिर की थी। एनएमसी ने साफ किया है कि सभी संस्थानों को नोटिस जारी होने की तारीख से 7 दिनों के भीतर अपनी फीस और स्टाइपेंड की जानकारी गूगल फॉर्म के जरिए जमा करनी होगी, ताकि सभी छात्रों और अभिभावकों को स्पष्ट जानकारी उपलब्ध हो सके। यह भी चेतावनी दी गई है कि बिना स्वीकृति लिए कोई भी छिपी हुई या अतिरिक्त फीस लेना अनधिकृत माना जाएगा, और ऐसा करने वाले संस्थानों पर शो कॉज नोटिस, जुर्माना, एडमिशन पर रोक, और कोर्स की मान्यता रद्द करने जैसे कड़े कदम उठाए जा सकते हैं। इस कदम का उद्देश्य न केवल शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ाना है, बल्कि छात्रों को छिपी हुई फीस और शोषणकारी इंटर्नशिप शर्तों से भी बचाना है।गौरतलब है कि हृरूष्ट, जो 2020 में मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की जगह गठित हुआ था। यह भारत में मेडिकल शिक्षा और मेडिकल प्रैक्टिस का शीर्ष नियामक निकाय है। इसका काम शिक्षा के मानक तय करना, कॉलेजों और डॉक्टरों की निगरानी करना, और राष्ट्रीय स्वास्थ्य ज़रूरतों के अनुसार सुझाव देना है।

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