एक तरफ शासन-प्रशासन दावा करता है कि खरीदी केंद्रों में तिरपाल और कैप कवर की पुख्ता व्यवस्था है, लेकिन चपरीद केंद्र की हकीकत इन दावों से कोसों दूर है। जानकारी के मुताबिक, केंद्र में धान को ढंकने के लिए पर्याप्त पॉलिथीन और कवर उपलब्ध है, लेकिन कर्मचारी उसे उपयोग में लाने के बजाय ‘खानापूर्ति’ करने में व्यस्त हैं। देखने में प्रतीत होता है कि कर्मचारी धान के भीगने का इंतजार कर रहे हैं ताकि लापरवाही पर पर्दा डाला जा सके।

‘सूखत’ का डर या सोची-समझी रणनीति?
चपरीद सहित आरंग क्षेत्र के धान खरीदी केंद्रों में धान के उठाव (Transportation) की गति बेहद धीमी है। धान के लंबे समय तक खुले में पड़े रहने से उसमें प्राकृतिक रूप से वजन कम होता है, जिसे ‘सूखत’ कहा जाता है। सूत्र बताते हैं कि समिति के कर्मचारी इस सूखत की भरपाई करने के लिए धान को बारिश में भीगने दे रहे हैं।
“धान जब भीग जाएगा, तो उसका वजन बढ़ जाएगा।” इसी गणित के चलते जानबूझकर लापरवाही बरती जा रही है, जिससे बाद में नमी के नाम पर खराब गुणवत्ता का बहाना बनाया जा सके। धान को बिना किसी सुरक्षा कवर के खुले मैदान में रखा है।वही परिवहन की धीमी रफ्तार ने केंद्र को जाम कर दिया है। मौसम विभाग की जारी चेतावनी के बावजूद उच्च अधिकारियों द्वारा जमीनी निरीक्षण का अभाव यहां साफ देखने को मिल रहा है।
संज्ञान नहीं लेने पर शासन को करोड़ों की हानि होना तय
यह स्थिति तब है जब सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि बारिश से धान को बचाने के लिए जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाए। चपरीद केंद्र की यह तस्वीर शासन के उन दावों की पोल खोल रही है, जिसमें ‘बेहतर प्रबंधन’ की बात कही जाती है। अगर जल्द ही इस पर संज्ञान नहीं लिया गया तो शासन को करोड़ों रुपये के राजस्व की हानि होना तय है।
लापरवाही बतरने पर होगी कार्रवाई : SDM
इस मामले में आरंग SDM अभिलाषा पैकरा का कहना है कि बेमौसम बारिश से निपटने के लिए धान खरीदी केंद्रों में पर्याप्त व्यवस्था है। अगर कही भी लापरवाही बरती जाएगी तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाएगी।






