- जानकारी के अनुसार, वेयरहाउस में रखा लगभग 22 हजार टन गेहूं लंबे समय तक पड़ा रहा। खराब होते अनाज को बचाने के लिए करीब 34 बार कीटनाशक छिड़काव किया गया, लेकिन हालात इतने खराब हो गए कि यह गेहूं पशुओं के चारे के लायक भी नहीं बचा। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस तरह का खराब अनाज स्वास्थ्य के लिए भी खतरनाक हो सकता है।
साल 2022 में सीहोर जिले के बकतरा से इस खराब गेहूं को रायसेन जिले के वेयर हॉउस में शिफ्ट किया गया था। लेकिन बड़ा सवाल यह हैं कि सीहोर जिले के गेहूं को क्यों सिफ्ट किया गया। जबकि 2022 में नूरगंज और दिवटिया के वेयर हॉउसो में रखवाया जा रहा था तब यह हजारों मेट्रिक टन गेहूं खराब हो गया था। तब इसे रखने की अनुमति कैसे दी गई? आखिर किसके दबाव में प्रशासन ने एक जिले से दूसरे जिले के वेयर हाउस में हजारों मीट्रिक टन गेहूं को रखवाया गया। अब सवाल यह उठ रहा है कि इतने बड़े नुकसान का जिम्मेदार कौन है। फिलहाल अधिकारी इस पूरे मामले की जांच कर रहे हैं और खराब गेहूं को नीलाम करने या नष्ट करने पर फैसला लिया जा सकता है।


अनादि न्यूज़ डॉट कॉम ,रायसेन मध्यप्रदेश के रायसेन जिले से हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है। यहां सरकारी वेयरहाउस में रखा हजारों टन गेहूं पूरी तरह सड़ गया है। बताया जा रहा है कि करीब 35 करोड़ रुपये कीमत का गेहूं खराब हो गया, लेकिन इसे बचाने के प्रयास में किराया, रखरखाव और कीटनाशक छिड़काव पर खर्च बढ़कर लगभग 150 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।


