बेयरबॉक ने शुक्रवार को कहा कि चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और संतुलित होगी। यह एक बहुत ही पारदर्शी, तटस्थ और निष्पक्ष प्रक्रिया है, जिसमें हर उम्मीदवार को समान अवसर और बराबरी का मौका मिलेगा।
इस दौरान उम्मीदवारों से कई तरह के सवाल भी पूछे जाएंगे। यह संवाद सिर्फ सदस्य देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सिविल सोसायटी संगठनों को भी इसमें शामिल किया जाएगा। पूरी प्रक्रिया को वेब पर लाइव प्रसारित किया जाएगा, ताकि दुनियाभर के लोग इसे देख सकें।
पिछले साल बेयरबॉक और उस समय के सुरक्षा परिषद अध्यक्ष ने इस पद के लिए महिला उम्मीदवारों को आगे आने की अपील की थी। इसके पीछे व्यापक भावना यह थी कि संयुक्त राष्ट्र के 80 साल के इतिहास में अब तक किसी महिला को महासचिव बनने का मौका नहीं मिला है, इसलिए अब किसी महिला को संगठन का नेतृत्व मिलना चाहिए।
महासभा के प्रस्ताव में भी चुनाव प्रक्रिया में लैंगिक संतुलन को एक महत्वपूर्ण लक्ष्य बताया गया है। हालांकि अब तक सामने आए पांच उम्मीदवारों में से दो पुरुष हैं।
अब तक नामांकन पाने वाली तीन महिला उम्मीदवारों में सबसे प्रमुख नाम चिली की पूर्व राष्ट्रपति मिशेल बैचेलेट का है। बैचेलेट संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार उच्चायुक्त भी रह चुकी हैं। उन्हें चिली, ब्राजील और मेक्सिको ने नामित किया है।
दूसरी उम्मीदवार कोस्टा रिका की रेबेका ग्रिन्सपैन हैं, जो इस समय यूएन ट्रेड एंड डेवलपमेंट (यूएनसीटीएडी) की महासचिव हैं। वह कोस्टा रिका की पूर्व उपराष्ट्रपति भी रह चुकी हैं।
तीसरी महिला उम्मीदवार अर्जेंटीना की वर्जीनिया गाम्बा हैं। उन्हें मालदीव ने नामित किया है। गाम्बा संयुक्त राष्ट्र में कई वरिष्ठ पदों पर काम कर चुकी हैं। वह महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की विशेष प्रतिनिधि (बच्चों और सशस्त्र संघर्ष के मुद्दे पर) भी रह चुकी हैं और रासायनिक हथियार निषेध संगठन की प्रमुख भी रह चुकी हैं।
महासचिव पद की दौड़ में दो पुरुष उम्मीदवार भी शामिल हैं। इनमें से एक अर्जेंटीना के राफेल ग्रॉसी हैं, जो इस समय अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के प्रमुख हैं। उन्हें अर्जेंटीना ने ही नामित किया है।
दूसरे उम्मीदवार मैकी साल हैं, जिन्हें बुरुंडी ने नामित किया है। साल पहले सेनेगल के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री भी रह चुके हैं। महासचिव पद के लिए नामांकन की अंतिम तारीख 1 अप्रैल तय की गई है।
हालांकि महासभा में महासचिव के चयन के लिए साधारण बहुमत की जरूरत होती है, लेकिन असली फैसला अक्सर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में होता है। सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्य देशों के पास वीटो शक्ति होती है। संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुसार, महासभा महासचिव की नियुक्ति सुरक्षा परिषद की सिफारिश पर करती है।
बेयरबॉक ने बताया कि उम्मीदवारों के साथ होने वाले संवाद का पहला हिस्सा उनके व्यक्तिगत दृष्टिकोण और प्रबंधन कौशल पर केंद्रित होगा। दूसरे हिस्से में संयुक्त राष्ट्र के तीन प्रमुख स्तंभों (शांति और सुरक्षा, सतत विकास और जलवायु परिवर्तन, तथा मानवाधिकार) पर चर्चा होगी।






