
हरिवंश का पिछला कार्यकाल 9 अप्रैल को खत्म हो गया था। उनकी पार्टी JDU ने इस बार नाम नहीं दिया था। इसके बाद राष्ट्रपति ने उनका मनोनयन किया। हरिवंश की यह नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद 80 के खंड (1) के उपखंड (a) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, तथा उसी अनुच्छेद के खंड (3) के तहत की गई है। 69 साल के हरिवंश 2032 तक राज्यसभा में रहेंगे।
18 मार्च को पीएम मोदी ने कमबैक का हिंट दिया था
बजट सत्र के दूसरे चरण के दौरान राज्यसभा में रिटायर हो रहे सांसदों का विदाई समारोह 18 मार्च को हुआ था। इस दौरान पीएम मोदी ने हरिवंश के लिए कहा था- “हमारे उपसभापति हरिवंश विदा ले रहे हैं। हरिवंश को इस सदन में लंबे समय तक अपनी जिम्मेदारियों को निभाने का अवसर मिला।”
पीएम मोदी ने हिंट दी थी कि हरिवंश की राजनैतिक पारी अभी खत्म नहीं हुई है, वे आगे भी जनहित में काम करते रहेंगे। इसके आधार पर ही यह माना जा रहा है हरिवंश नारायण को मनोनीत सांसद बनाकर दोबारा लाया गयाहै।
पत्रकारिता से राजनीति तक का सफर
हरिवंश नारायण सिंह एक अनुभवी पत्रकार के रूप में जाने जाते हैं। उन्होंने लंबे समय तक हिंदी दैनिक ‘प्रभात खबर’ के प्रधान संपादक के पद पर कार्य किया। पत्रकारिता क्षेत्र में उनकी अलग पहचान रही है। 2014 में वे जनता दल (यूनाइटेड) के टिकट पर बिहार से राज्यसभा सदस्य चुने गए थे।
संसद में उनकी कार्यशैली संतुलित और शांतिपूर्ण
संसद में उनकी कार्यशैली संतुलित और शांतिपूर्ण मानी जाती है। वे 9 अगस्त 2018 को पहली बार राज्यसभा के उपसभापति बने और फिर 14 सितंबर 2020 को दोबारा इस पद पर निर्वाचित हुए। उपसभापति के रूप में उन्होंने संसद की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस बार राष्ट्रपति द्वारा सीधे नामित किए जाने के साथ ही हरिवंश नारायण सिंह राज्यसभा में अपनी सेवाएं जारी रखेंगे।





