एग्रीस्टेक बना किसानों के लिए सिरदर्द, रकबा गड़बड़ी से धान बिक्री रुकी, सिस्टम के आगे बेबस अन्नदाता
अनादि न्यूज़ डॉट कॉम, महासमुंद। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा किसानों के लिए एग्रीस्टेक पंजीयन को अनिवार्य किए जाने के बाद जिले में किसान गंभीर परेशानियों का सामना कर रहे हैं. ऑनलाइन रकबा शून्य या कम दिखने के कारण कई किसान समर्थन मूल्य पर धान नहीं बेच पा रहे हैं, जिससे वे आर्थिक संकट में फंस गए हैं. लाखों रुपये का केसीसी और सहकारी बैंक ऋण लेकर खेती करने वाले किसान अब समाधान के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं.


किसानों का आरोप है कि रकबा सुधार कराने के लिए वे पिछले 20 से 25 दिनों से तहसील और पटवारी कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है. इस मामले में महासमुंद कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने स्वीकार किया कि तकनीकी कारणों से कुछ दिक्कतें आ रही हैं, लेकिन प्रशासन यह सुनिश्चित करेगा कि सही किसानों का पूरा धान खरीदा जाए.
जल्द होगा निराकरण : महासमुंद कलेक्टर
महासमुंद कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने इस मामले में कहा कि पंजीकृत किसानों का धान हम लेंगे. वारिसन पंजीयन भी शुरू हो गई है. यदि किसी किसान की मृत्यु से पहले उन्होंने अपना पंजीयन एग्रीस्टेक में कराया था और उसकी पावती होगी, तो उनके वारिसन (परिवार) धान बेंच सकते हैं. वहीं उन्होंने तकनिकी समस्याओं को लेकर कहा कि हमें रोजाना ऐसी समस्याओं की जानकारी मिल रही है. जल्द ही इसका समाधान किया जाएगा और किसान अपना दान बेच पाएंगे. हम स्वयं इस मामले को देख रहे हैं.





