“दुर्ग से दोबारा चल सकती हैं बंद ट्रेनें… रेलवे इस पर फैसला लेने की तैयारी में।”
विशाल विशाखापट्टनम डिवीजन को दो हिस्से में कर नया रायगड़ा डिवीजन तैयार कर लिया गया है. इस प्रक्रिया के बाद रायगड़ा डिवीजन अपनी आय बढ़ाने नई योजनाओं पर विचार कर रही है. इसके 5 वर्षों से बंद दुर्ग-जगदलपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस को नई समय सारणी के साथ जगदलपुर के बजाय किरंदुल से चलाने पर विचार किया जा रहा है. तर्क दिया जा रहा है कि जगदलपुर से किरंदुल के मध्य रेल दोहरीकरण का कार्य इस वर्ष पूर्ण हो जाएगा. रेलवे के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि विशाखापट्टनम से अलग बनाया गया रायगढ़ डिवीजन अपनी आय बढ़ाने हर संभव विचार कर रही है. उसका पूरा ध्यान बस्तर की तरफ है. सूत्रों ने बताया कि हालांकि रायगढ़ डिवीजन का सारा कार्य फिलहाल विशाखापट्टनम से हो रहा है किंतु नया डिवीजन बनाए जाने के बाद इस डिवीजन की का अपना रिकॉर्ड अलग होगा इसलिए रायगढ़ डिवीजन का पूरा ध्यान बस्तर की तरफ है.
पूरा ध्यान बस्तर की ओर
बचेली किरंदुल लौह अयस्क परियोजनाएं अब रायगड़ा डिविजन अंतर्गत आ गई है और यह परियोजनाएं ही इस डिवीजन की आय का मुख्य स्रोत है. रेल सुविधाओं को तरस रहे बस्तरवासियों को यह डिविजन शांत रखना चाहती है. लौह अयस्क की दुलाई से आशातीश राजस्व प्राप्त करने के अलावा रेलवे बस्तर वालों की सुविधाओं का भी ख्याल रखना चाहती है. चूंकि बैलाडीला प्रक्षेत्र से अब दो निजी कंपनियां भी लौह अयस्क उत्खनन करने जा रही है.
सूत्रों ने बताया कि अपनी आय बढ़ाने के उद्देश्य से ही नया डिवीजन 5 साल से बंद जगदलपुर-दुर्ग इंटरसिटी एक्सप्रेस को फिर से चालू करने गंभीर से विचार कर रही है. यह तर्क दिया जा रहा है कि बचेली, किरंदुल, भांसी, दंतेवाड़ा गीदम क्षेत्र के लोगों को ट्रेन में यात्रा करने के लिए जगदलपुर स्टेशन आना पड़ता है. दुर्ग एक्सप्रेस को किरंदुल से शुरू करने पर इस एक्सप्रेस को पर्याप्त पैसेंजर मिलेंगे. इस तर्क के साथ ही दुर्ग एक्सप्रेस को नई समय सारणी के साथ किरंदुल से शुरू करने व्यापक चर्चा चल रही है. बताया गया कि कामलूर से बचेली के मध्य करीब 40 किमी रेल दोहरीकरण कार्य 2025 के अंत तक पूर्ण कर लिया जाएगा. इसके पूर्ण होते ही दुर्ग एक्सप्रेस को चलाने गंभीरता की चर्चा हो रही है.





