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दिल्ली में जल संकट पर बड़ा कदम: सूखे जलाशयों को पुनर्जीवित कर जलभराव से भी मिलेगी राहत

अनादि न्यूज़ डॉट कॉम,राजधानी दिल्ली में पानी संकट और जलभराव जैसी समस्याओं से निपटने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद 77 सूखे और उपेक्षित जलाशयों को अगले 90 दिनों के भीतर दोबारा जीवित करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। DDA ने इसके लिए चरणबद्ध योजना तैयार की है, जिसकी निगरानी खुद उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू (Tarunjit Singh Sandhu) कर रहे हैं। डीडीए राजधानी में 77 जल निकायों के कायाकल्प और जीर्णोद्धार का कार्य चरणबद्ध तरीके से शुरू करेगा।

उपराज्यपाल ने कहा कि दिल्ली में तेजी से बढ़ते शहरीकरण और जल संकट को देखते हुए जलाशयों का पुनर्जीवन बेहद जरूरी है। इससे न केवल जल संरक्षण में मदद मिलेगी, बल्कि पर्यावरण संतुलन और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को भी लाभ पहुंचेगा। अधिकारियों के मुताबिक, इस अभियान का उद्देश्य दिल्ली में भूजल स्तर सुधारना, जल संरक्षण को बढ़ावा देना और बरसात के दौरान जलभराव की समस्या को कम करना है। लंबे समय से उपेक्षित पड़े इन जलाशयों की सफाई, गहरीकरण और पुनर्विकास का काम किया जाएगा, ताकि वे दोबारा जल संग्रहण में सक्षम हो सकें।

डीडीए ने इस रिवाइवल अभियान को तीन चरणों में बांटा है। पहले चरण में 6 जलाशयों को एक महीने के भीतर पुनर्जीवित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद दूसरे चरण में 48 जलाशयों पर 60 दिनों के भीतर काम पूरा किया जाएगा। वहीं, तीसरे चरण में बाकी 23 जलाशयों को 90 दिनों के अंदर पुनर्विकसित करने की योजना बनाई गई है। अधिकारियों के मुताबिक, इस अभियान के तहत जलाशयों की सफाई, गहरीकरण, जल संग्रहण क्षमता बढ़ाने और आसपास की जल निकासी व्यवस्था को सुधारने का काम किया जाएगा। इसके साथ ही अतिक्रमण हटाने और पर्यावरण संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। डीडीए का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य राजधानी में भूजल स्तर को बेहतर बनाना, वर्षा जल संरक्षण को बढ़ावा देना और बारिश के दौरान होने वाले जलभराव की समस्या को कम करना है। लंबे समय से उपेक्षित पड़े जल निकायों को दोबारा सक्रिय कर शहर की जल संरचना को मजबूत बनाने की कोशिश की जा रही है।

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सूखी झीलों और तालाबों को फिर से मिलेगा जीवन

इस पूरी परियोजना की समीक्षा बैठक में उपराज्यपाल ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी कार्य तय समय सीमा के भीतर हर हाल में पूरे किए जाएं। बैठक के दौरान डीडीए अधिकारियों ने जलाशयों के पुनर्जीवन से जुड़ी विस्तृत प्रस्तुति दी। अधिकारियों के मुताबिक, अभियान की शुरुआत उन झीलों और जलाशयों से की जाएगी जो पूरी तरह सूख चुके हैं। इन स्थानों पर बड़े पैमाने पर खुदाई, गाद हटाने और आसपास के कैचमेंट एरिया की सफाई का काम किया जाएगा, ताकि मॉनसून के दौरान अधिक से अधिक वर्षा जल संग्रहित किया जा सके।

डीडीए ने इस अभियान को तीन चरणों में विभाजित किया है। पहले चरण में 6 जलाशयों को एक महीने के भीतर पुनर्जीवित करने का लक्ष्य रखा गया है। दूसरे चरण में 48 जलाशयों पर 60 दिनों में काम पूरा किया जाएगा, जबकि शेष 23 जलाशयों को 90 दिनों के भीतर तैयार करने की योजना बनाई गई है। अधिकारियों ने बताया कि दूसरे चरण में जलाशयों के किनारों को मजबूत करने, हरियाली बढ़ाने, फेंसिंग लगाने और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) स्थापित करने जैसे कार्य किए जाएंगे। इससे जल स्रोतों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने और प्रदूषण से बचाने में मदद मिलेगी।

मॉनसून से पहले जलभराव कम करने पर फोकस

अधिकारियों के अनुसार, दूसरे चरण में जलाशयों के किनारों को मजबूत करने, हरियाली बढ़ाने, फेंसिंग लगाने और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) स्थापित करने जैसे कार्य भी किए जाएंगे, ताकि जल स्रोत लंबे समय तक सुरक्षित और स्वच्छ बने रहें। दिल्ली में आमतौर पर जून के आखिर तक मॉनसून दस्तक देता है। ऐसे में डीडीए तय समय सीमा के भीतर काम पूरा करने के लिए तेजी से अभियान चला रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यदि जलाशयों का पुनर्जीवन समय पर हो जाता है, तो इससे न केवल जलभराव कम होगा बल्कि भूजल स्तर सुधारने और वर्षा जल संरक्षण में भी मदद मिलेगी।

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इन इलाकों के जलाशयों से होगी शुरुआत

इस परियोजना के पहले चरण में जिन जलाशयों को पुनर्जीवित किया जाएगा उनमें सुल्तानपुर डबास, रानीखेड़ा, मदनपुर डबास, बांकनेर के दो जलाशय और मामूरपुर का जलाशय शामिल हैं। इन इलाकों में लंबे समय से सूखे पड़े जल स्रोत अब दोबारा पानी से भरते दिखाई दे सकते हैं।  इन जलाशयों में बड़े पैमाने पर खुदाई, गाद हटाने और कैचमेंट एरिया की सफाई का काम किया जाएगा, ताकि बारिश का अधिकतम पानी इन जल निकायों में संग्रहित किया जा सके। इससे बारिश का पानी सीधे सीवर लाइनों में जाने के बजाय जलाशयों में जमा होगा और ड्रेनेज सिस्टम पर दबाव कम पड़ेगा।