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खरीदी से पहले सहकारी समिति के कर्मचारी और कंप्यूटर ऑपरेटर अपनी चार सूत्रीय मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। पांचों संभागों में प्रदर्शन की शुरुआत हो चुकी है।

छत्तीसगढ़ : धान खरीदी से पहले अनिश्चितकालीन हड़ताल पर सहकारी समिति कर्मचारी और कंप्यूटर ऑपरेटर, चार सूत्रीय मांगों को लेकर पांच संभागों में प्रदर्शन शुरू

अनादि  न्यूज़ डॉट कॉम, महासमुंद। छत्तीसगढ़ में जहां एक ओर 15 नवंबर से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी शुरू होने जा रही है, वहीं दूसरी ओर धान खरीदी से पहले ही सहकारी समिति कर्मचारी और कंप्यूटर ऑपरेटर हड़ताल पर चले गए हैं। पांच संभागों के सैकड़ों कर्मचारियों ने सरकार से चार सूत्रीय मांगों को लेकर आज से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है, जिससे धान खरीदी की तैयारी पर असर पड़ सकता है।

इसी कड़ी में महासमुंद के लोहिया चौक पर पांच संभाग (महासमुंद, रायपुर, बलौदाबाजार, धमतरी एवं गरियाबंद) के सैकड़ों कर्मचारियों ने धरना-प्रदर्शन का आयोजन किया। धरने के दौरान समिति के कर्मचारी व कंप्यूटर ऑपरेटरों ने जमकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

ये हैं संघ की चार प्रमुख मांगें

  1. जिला सहकारी समिति कर्मचारी संघ की मांग है कि धान खरीदी वर्ष 2023-24 एवं 2024-25 की संपूर्ण सुखद राशि समितियों को प्रदान की जाए।
  2. धान परिवहन में विलंब रोकने के लिए प्रत्येक सप्ताह संपूर्ण धान परिवहन सुनिश्चित किया जाए।
  3. धान खरीदी में शॉर्टेज, प्रोत्साहन, कमीशन, सुरक्षा व्यय बढ़ाया जाए तथा मध्यप्रदेश की तर्ज पर उचित मूल्य विक्रेताओं को 3000 प्रतिमाह मानदेय दिया जाए।
  4. धान खरीदी नीति 2024-25 की कंडिका 11.3.3 के तहत आउटसोर्सिंग से ऑपरेटर की नियुक्ति समाप्त कर विभागीय रूप से नियमितीकरण किया जाए।

संघ के प्रदेश अध्यक्ष और प्रदेश सचिव का कहना है कि जब तक मांग पूरी नहीं होती है हम लोगों की हड़ताल जारी रहेगा।

धान खरीदी 15 नवंबर से शुरू

बता दें कि खरीफ विपणन सत्र 2025-26 के तहत प्रदेश में धान खरीदी 15 नवंबर से शुरू होगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इसकी घोषणा करते हुए बताया कि सभी पंजीकृत किसानों से प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान समर्थन मूल्य पर खरीदा जाएगा। राज्य सरकार ने इस बार भी किसानों को समय पर भुगतान और पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। पिछले वर्ष धान खरीदी 14 नवंबर से 31 जनवरी 2025 तक चली थी, जिसमें 25.49 लाख किसानों ने हिस्सा लिया था और रिकॉर्ड 149.25 लाख टन धान खरीदा गया था।

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