मरवाही जनपद में बड़ा घोटाला: सर्व शिक्षा अभियान के खाते से लाखों की हेराफेरी, सरकार के आदेशों की उड़ाई धज्जियां
अनादि न्यूज़ डॉट कॉम गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही। जनपद पंचायत मरवाही में भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितता का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। सूचना के अधिकार (RTI) से प्राप्त दस्तावेजों और बैंक स्टेटमेंट ने शासन के नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले इस खेल का खुलासा हुआ है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मरवाही मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) द्वारा सर्व शिक्षा अभियान समग्र मद के खाते से लाखों रुपये का लेन-देन किया गया है। यह पूरा ट्रांजेक्शन सर्व शिक्षा अभियान समग्र के स्थापित नियमों के विपरीत है।
सरकार की रोक के बावजूद राशि का आहरण
मामले में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि वर्तमान राज्य सरकार ने एक आधिकारिक पत्र के माध्यम से सभी विकासखंड स्रोत समन्वयक (BRCC) को स्पष्ट आदेश दिया था कि सर्व शिक्षा अभियान समग्र की राशि वापस की जाए। सरकार के इस सख्त निर्देश के बावजूद, मरवाही जनपद में राशि को वापस करने के बजाय उसे लगातार खर्च किया जाता रहा।
नियमों के मुताबिक, इस खाते से किसी भी प्रकार का भुगतान बिना BRCC की सहमति या उनके हस्ताक्षर के संभव नहीं है। ऐसे में बिना BRCC के संज्ञान या हस्ताक्षर के लाखों रुपये का ट्रांजेक्शन होना जनपद पंचायत की कार्यप्रणाली और मिलीभगत पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
शिक्षा विभाग के नियमों के अनुसार, सर्व शिक्षा अभियान समग्र के बैंक खातों का संचालन मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) और विकासखंड समन्वयक (BRCC) के संयुक्त हस्ताक्षर से होना अनिवार्य है। लेकिन मरवाही में इन नियमों को दरकिनार कर सीईओ जनपद द्वारा एकल या अनाधिकृत रूप से खातों का संचालन किया गया।

करोड़ों का संदिग्ध लेनदेन: आंकड़ों की जुबानी
भारतीय स्टेट बैंक (SBI) शाखा मरवाही के खाता क्रमांक 11556672537 के विवरण चौंकाने वाले हैं – 01 जनवरी 2022 से 31 दिसंबर 2024: इस अवधि के दौरान खाते से 99 लाख 27 हजार 684 रुपये अन्यत्र डेबिट किए गए। 27 मई 2024 से 12 जून 2025: इस छोटी सी अवधि में भी 12 लाख 64 हजार 276 रुपये का आहरण किया गया।
सबसे गंभीर बात यह है कि राज्य शासन द्वारा इस योजना की शेष राशि को वापस करने के स्पष्ट आदेश जारी किए जाने के बाद भी, इस मद से लगातार पैसा निकाला जाता रहा।
दस्तावेजों से यह भी संकेत मिले हैं कि सरकारी राशि का उपयोग सर्व शिक्षा अभियान समग्र में खर्च तो नही किया, लेकिन पेट्रोल पंपों, टूर एंड ट्रेवल्स और कुछ व्यक्तिगत नामों के खातों में ट्रांसफर करने के लिए किया गया। सवाल यह उठता है कि जिस राशि पर तत्कालीन और वर्तमान सीईओ का ट्रांजैक्शन अधिकार ही नहीं था, उसे निजी कार्य के लिए कैसे इस्तेमाल किया गया?
जांच के घेरे में जिम्मेदार
इस पूरे गड़बड़झाले में तत्कालिक और वर्तमान सीईओ मरवाही की कार्यप्रणाली जांच के दायरे में है। नियमों के विरुद्ध इन ट्रांजैक्शनों ने प्रशासन की पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
जिला शिक्षा अधिकारी रजनीश तिवारी ने मामले में जानकारी देते हुए बताया कि संयुक्त खाते का नियम है. उन्होंने स्पष्ट किया कि सर्व शिक्षा अभियान समग्र का बैंक खाता कभी भी सिंगल ऑपरेटेड एकल संचालित नहीं होता। इसे BRC (ब्लॉक रिसोर्स सेंटर) और CEO (जनपद पंचायत) के संयुक्त हस्ताक्षरों से ही संचालित किया जाना चाहिए।
इस अभियान के तहत राशि का आवंटन विशिष्ट कार्यों जैसे भवन निर्माण, अतिरिक्त कक्ष, या जल संचयन के लिए मद-वार (Head-wise) किया जाता है। राज्य शासन और SPO (राज्य परियोजना कार्यालय) के निर्देशों के अनुसार, अप्रयुक्त राशि को सरेंडर करने के आदेश पहले ही जारी किए जा चुके थे। यदि अभी अब तक राशि जमा नहीं की गई है, तो इसकी भी जांच होगी।
तो निश्चित रूप से की जाएगी कार्रवाई
मामले में जिला पंचायत CEO मुकेश रावटे ने कहा कि सर्व शिक्षा अभियान समग्र और अन्य योजनाओं की राशि का व्यय नियमानुसार होना चाहिए। मीडिया के माध्यम से मामला संज्ञान में आया है। जिला शिक्षा अधिकारी इस संबंध में से प्रतिवेदन मांगा जा रहा है। यदि गाइडलाइन के विपरीत कार्य हुआ है, तो निश्चित रूप से आगे की कार्रवाई की जाएगी।






