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कांवड़ यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए भारी वाहनों पर लगेगी रोक

अनादि न्यूज़ डॉट कॉम, उत्तर प्रदेश : आस्था से भरी इस विशेष यात्रा कांवड़ यात्रा के चलते 11 जुलाई 2025 से गाजियाबाद में भारी वाहनों के डायवर्जन की तैयारी जोरों पर है। आम लोगों की सुविधा और कांवड़ियों की सुरक्षा को देखते हुए दिल्ली-मेरठ रोड पर भारी वाहनों के आवागमन पर रोक प्रस्तावित की गई है। यह बदलाव सिर्फ ट्रैफिक प्लानिंग नहीं है, बल्कि लाखों श्रद्धालुओं की आस्था और भावनाओं से जुड़ा फैसला है। साथ ही 15 जुलाई 2025 से इन रूटों को वन-वे किया जा सकता है। दिल्ली मेरठ एक्सप्रेस-वे पर डासना से मेरठ तक भी ऐसी ही व्यवस्था लागू करने की योजना है, ताकि कांवड़ यात्रा पूरी तरह सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हो सके।

कांवड़ यात्रा को शांतिपूर्ण और भव्य तरीके से संपन्न कराने के लिए बुधवार को पुलिस लाइन में अंतरराज्यीय समन्वयक बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में सभी संबंधित राज्यों के अधिकारी मौजूद रहे, ताकि विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की जा सके। रूट डायवर्जन की रणनीति और मुख्य बिंदुओं को पीपीटी के माध्यम से स्पष्ट रूप से समझाया गया। अपर पुलिस आयुक्त आलोक प्रियदर्शी ने बताया कि 11 जुलाई 2025 से दिल्ली-मेरठ रोड और एक्सप्रेस-वे के चौथे चरण (डासना से मेरठ) पर भारी वाहनों का संचालन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। इतना ही नहीं गंगनहर पटरी और पाइपलाइन मार्ग पर भी भारी वाहनों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि कांवड़ियों की संख्या में कोई बढ़ोतरी होती है तो तिथियों में लचीलापन भी रखा जाएगा। नगर निगम ने कांवड़ यात्रा को लेकर व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। यात्रा की हर गतिविधि पर नजर रखने के लिए मेरठ तिराहा पर विशेष कंट्रोल रूम बनाया गया है। यहां से मेरठ रोड और जीटी रोड दोनों पर नजर रखी जाएगी। पूरे मार्ग पर 200 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे, जो कंट्रोल रूम से जुड़े रहेंगे।

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नगर आयुक्त ने बताया कि सफाई व्यवस्था 24 घंटे चालू रहेगी और मेरठ रोड पर अस्थाई लाइटिंग की भी व्यवस्था की जाएगी, ताकि किसी भी श्रद्धालु को असुविधा न हो। पुलिस लाइन में आयोजित समन्वय बैठक में यह भी बताया गया कि पूरे कांवड़ मार्ग पर तीन मुख्य नियंत्रण कक्ष, एक यातायात नियंत्रण कक्ष और 12 उप नियंत्रण कक्षों से निगरानी की जाएगी। इस महत्वपूर्ण बैठक में पड़ोसी राज्यों और जिलों के अधिकारी भी मौजूद रहे, ताकि हर स्तर पर बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया जा सके।