अनादि न्यूज़ डॉट कॉम,केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ( CBSE ) के 2026-27 शैक्षणिक सत्र से कक्षा 9 और 10 के छात्रों के लिए तीसरी भाषा अनिवार्य करने के निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) के जरिए चुनौती दी गई है। याचिका में छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों की ओर से नई भाषा नीति को अव्यावहारिक बताते हुए इसे रद्द करने की मांग की गई है। सीबीएसई की नई तीन-भाषा नीति को लेकर वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की है. याचिका में उन्होंने कहा कि कक्षा 9 के छात्रों पर अचानक अतिरिक्त भाषाएं पढ़ने का दबाव डालना ठीक नहीं है.
CBSE को लेकर बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है. जहां एक ओर 12वीं बोर्ड परीक्षा के बाद से स्कैंड कॉपियों को लेकर मामला थम नहीं रहा है तो वहीं थ्री लैंग्वेज पॉलिसी पर बहस जारी है.
CBSE से जुड़े विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. ऑन स्क्रीन मार्किंग के बाद थ्री लैंग्वेज पॉलिसी को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं. अब ये मामला कानून की चौखट तक पहुंच गया है. मामले में वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत के सामने मामले की अर्जेट सुनवाई के लिए मौखिक अनुरोध किया। रोहतगी ने दलील दी कि CBSE की नई नीति के तहत कक्षा 9 में छात्रों पर अतिरिक्त भाषाएं अनिवार्य की जा रही हैं, जिससे पढ़ाई का दबाव बढ़ेगा और परीक्षा व्यवस्था में अव्यवस्था पैदा होगी।
रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका का हवाला देते हुए कहा कि बोर्ड परीक्षाओं के करीब पहुंचे छात्रों के लिए इस नई नीति को लागू करना व्यावहारिक नहीं है. मुझे समझ नहीं आता कि कक्षा 9 का छात्र अचानक दो और भाषाएं कैसे पढ़ सकता है और कक्षा 10 की परीक्षा कैसे दे सकता है. उन्होंने इस नीति को विघटनकारी बताते हुए कहा कि इससे छात्रों, स्कूलों और अभिभावकों के बीच भ्रम और परेशानी पैदा हो सकती है.
पहले कहा जा रहा था कि ये पॉलिसी कक्षा 6 से शुरू होगी लेकिन फिर अब इसे 9वीं और 10वीं के छात्रों के लिए भी लागू कर दिया गया. ऐसे में अभिभावकों का कहना है कि उनके बच्चे ने 6वीं से किसी और भाषा की पढ़ाई नहीं की है और अचानक ऐसा करना उनपर दबाव बना सकता है.
भारत के चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने यह मामला तुरंत उठाया गया. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह इस पर अगले हफ्ते सुनवाई करेगा. इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि इस मामले पर अगले सप्ताह विचार किया जाएगा.
बता दें कि CBSE ने न्यू एजुकेशन पॉलिसी के तहत थ्री लैंग्वेज पॉलिसी को स्कूलों को लागू करने के लिए कहा था. इस नियम के अनुसार, छात्रों को दो के बजाय तीन भारतीय भाषा पढ़नी होंगी, जिनमें से कम से कम दो भारतीय भाषा जरूरी है, यानी हिंदी और अंग्रेजी के अलावा एक और भारतीय भाषा में पढ़ाई को जरूरी किया जा रहा है.





