अनादि न्यूज़ डॉट कॉम,। वर्ष 2001में भारतीय जनता पार्टी की अटल बिहारी बाजपेई की सरकार ने देश में पेट्रोल में एथेनॉल मिलने की प्रक्रिया शुरू की जिसे विभिन्न प्रकार के परीक्षण एवम् ऑटोमोबाइल कंपनियों से कई दौर की बात चीत के उपरांत 2003 में बाजपेई सरकार ने पेट्रोल में 5% एथेनॉल मिलने की स्वीकृत प्रदान करते हुए देश की पेट्रोलियम कंपनियों को 5%एथेनॉल मिलना अनिवार्य कर दिया। 2004 में जब केंद्र में कांग्रेस की डॉ मनमोहन सिंह की सरकार बनी तो एथेनॉल की मिलावट से वाहनों को होने वाली क्षति को ध्यान में रखते हुए पुनः ऑटोमोबाइल कंपनियों से चर्चा करने के उपरांत पेट्रोल में एथेनॉल मिलने की मात्रा 1.5% कर दिया जो कांग्रेस की सरकार के कार्यकाल तक प्रभावशील रहा।2014 में जब केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार बनी तो पूर्व में बाजपेई सरकार के पेट्रोल में 5% एथेनॉल मिलने के निर्णय को ध्यान में रखते हुए पुनः ऑटोमोबाइल कंपनियों एवं पेट्रोलियम कंपनियों से चर्चा प्रारंभ कर दी गई कई दौर की चर्चा के उपरांत 2020-21 में मूर्त रूप देते हुए पेट्रोल में 8.1% एथेनॉल मिलने का आदेश पेट्रोलियम कंपनियों को जारी कर दिया गया और बिना किसी प्रकार की समीक्षा किए बगैर क्रमशः 2021-22 में 10% ,2022-23 में 12% , 2023-24 में 14.6% , 2024-25 में 19.6% एवं नवम्बर 2025 में एथेनॉल की मात्रा बढ़ा कर 20% कर दिया गया और इस फ्यूल का नाम ई 20 रखा गया। यहां पर उल्लेखनीय है कि जब तक पेट्रोल में 10% एथेनॉल की मिलावट होती रही लोगों को फ्यूल के मिलावट के कारण वाहन के खराब होने की भनक तक नहीं लगी लेकिन जैसे जैसे पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ती गई वाहनों के खराब होने की संख्या में बढ़ोत्तरी होने से वाहन मालिक पेट्रोल पंप संचालक पर पानी मिलने का आरोप लगाने लगे।जबकि सच्चाई में वाहन की फ्यूल टंकी से पानी की तरह तरल पदार्थ के रूप में एथेनॉल की मिलावट की जाती थी सरकार ने जिसकी भनक तक आम जनता को नहीं लगने दी।
एथेनॉल की बढ़ती मिलावट के प्लान के तहत् नरेंद्र मोदी ने अपने मित्र मुकेश अंबानी को पेट्रोलियम क्षेत्र में उतरने की सलाह दी जिसको मूर्त रूप देने के लिए मुकेश अंबानी ने ब्रिटेन की पेट्रोलियम कंपनी भारत पेट्रोलियम के 51% शेयर खरीद कर समूचे देश में जिओ बी पी के नाम से पेट्रोल वितरण करना प्रारंभ कर दिया। भाजपाइयो की लूट का एक नमूना यह भी है कि पेट्रोलियम मंत्रालय का मामला होने के बावजूद ई 20 फ्यूल लागू करने के सबसे बड़े पक्षधर सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी है एथेनॉल मिलावटी फ्यूल से खराब हो रहे वाहन मालिकों की शिकायत को नजरअंदाज करते हुए देश में ई 20 पेट्रोल बिक्री के प्रमोशन में लगे हुए हैं। इसका मुख्य कारण है कि इनके दो बेटे एथेनॉल उत्पादक कंपनी के मालिक है सियान एग्रो इंडस्ट्री के मालिक निखिल गडकरी एवं मानस एग्रो इंडस्ट्री के मालिक सारंग गडकरी हैं यही नहीं देश के 10प्रमुख एथेनॉल उत्पादक कंपनी मे 7 महाराष्ट्र की है जिनके मालिक नितिन गडकरी के करीबियों में गिने जाते है।
यहाँ पर इस बात का जिक्र किया जाना आवश्यक है कि एक लीटर एथेनॉल की उत्पादन लागत 35 से 45रुपए आती है जबकि अपने आदमियों को उपकृत करने के लिए सरकार ने 71.86 रुपए अर्थात् लागत से दुगना खरीद रेट निर्धारित कर रखा है।
सबसे महत्वपूर्ण बात तो यह है कि एथेनॉल में पेट्रोल के मुकाबले 34% उर्जा क्षमता कम होती है।ऊर्जा क्षमता कम होने के कारण ई 20 फ्यूल में 5 से 6 किलो मीटर प्रति लीटर एवरेज वाहनों में कम मिलता है इसके अतिरिक्त वाहनों में प्रयुक्त रवर के पार्ट्स जल्दी खराब होते हैं, फ्यूल सिस्टम में कार्बन जमा होने से स्टार्ट होने में कठिनाई होती है एवं प्रयोग किए गए मेटल के पार्ट्स में जंग लगने के कारण जल्द खराब हो जाते हैं।
किसान कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय सचिव एवं प्रभारी छत्तीसगढ़ हरि गोविंद सिंह तिवारी ने केंद्रीय सरकार के मंत्री नितिन गडकरी एवं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाते हुए कहा है कि देश की प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनियों ने 2030 तक ई 20 फ्यूल लागू करने में सहमति जताई थी परंतु गडकरी एवं मोदी ने अपने मित्रों व सम्बन्धियों को लाभ पहुंचाने के लिए जल्दबाजी में 2025 में ही ई 20 फ्यूल लागू कर आम जनता के साथ लूट की है व लाखों वाहन खराब होने से आर्थिक क्षति पहुंचाई है जो अक्षम्य है जनता ऐसे लुटेरों को कभी माफ नहीं करेगी।





