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25 साल कांग्रेस में रहीं, BJP में आते ही बदली सियासी किस्मत : जानिए कौन हैं असम की इकलौती महिला मंत्री अजंता नियोग?

अनादि न्यूज़ डॉट कॉम,पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के बाद आज मंगलवार को असम में हिमंत बिस्वा सरमा ने लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है. सरमा सरकार में उनके साथ-साथ 4 अन्य विधायकों ने भी मंत्री पद की शपथ ली. इन 4 में एक महिला नेता भी शामिल हैं जो पिछले 25 सालों से विधायक हैं और वह भी पहले कांग्रेस में थीं, लेकिन बाद में वह भारतीय जनता पार्टी (BJP) में आ गईं.

असम में लगातार तीसरी बार सरकार बनाने वाली बीजेपी के साथ 2 अन्य सहयोगी दलों से भी 1-1 नेता मंत्री बनाए गए हैं. ये सहयोगी दल हैं असम गण परिषद (AGP) और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (BPF). असम गण परिषद के अध्यक्ष अतुल बोरा तो बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट के विधायक चरण बोरो ने मंत्री पद की शपथ ली. ये दोनों नेता राज्य में एनडीए की अगुवाई वाली पिछली बीजेपी सरकार में मंत्री रह चुके हैं. इसके अलावा पूर्व मंत्री रंजीत कुमार दास को असम विधानसभा स्पीकर पद के लिए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की ओर से उम्मीदवार बनाया गया है.

कैबिनेट में अकेली महिला मंत्री अजंता नियोग

हिमंता बिस्वा सरमा की नई सरकार में इकलौती महिला मंत्री जिनके नाम की सबसे ज्यादा चर्चा है, वो हैं अजंता नियोग. राज्य में एकमात्र महिला मंत्री अजंता राज्य की वरिष्ठ नेता हैं. उनके पास काफी अधिक प्रशासनिक और राजनीतिक अनुभव है और वह चुनावी मुकाबलों में अपनी कामयाबी के लिए भी जानी जाती हैं. साथ ही उन्हें असम की पहली महिला वित्त मंत्री होने का गौरव प्राप्त है. यही नहीं वह राज्य की सबसे अधिक समय तक विधायक रहने वाली महिला भी हैं.

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साल 1964 में गुवाहाटी में जन्मी, अजंता का नाता एक राजनीतिक परिवार से है, उनकी मां, रेबती दास और पति दोनों विधायक रहे हैं. मां रेबती ने जालुकबारी निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया था. रसूखदार राजनीतिक परिवार से नाता रखने वाली अजंता ने गुवाहाटी यूनिवर्सिटी से उच्चस्तरीय शिक्षा हासिल की. यहां से उन्होंने MA, LLB और LLM की डिग्री प्राप्त की. अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने गुवाहाटी हाई कोर्ट में एक वकील के रूप में वकालत की शुरुआत की.

पति की हत्या के बाद हुई राजनीति में एंट्री

वकालत करने वाली अजंता की राजनीति में एंट्री एक हादसे के बाद हुई थी. 1996 में उनके पति नागेन नियोग, जो उस समय राज्य मंत्री हुआ करते थे, की एक उग्रवादी हमले में हत्या कर दी गई थी. इस हमले में 8 लोग मारे गए हैं. पति की हत्या के बाद उन्होंने राजनीतिक दुनिया में कदम रखा. अजंता ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत कांग्रेस के साथ की और साल 2001 के विधानसभा चुनाव में गोलाघाट से जीत हासिल करने में कामयाब रहीं.

गोलाघाट से जीत का लगाया ‘छक्का’

गोलाघाट जिले की गोलाघाट विधानसभा सीट पर 2001 में पहली बार जीत हासिल करने के बाद अजंता ने अपने इस निर्वाचन क्षेत्र में लगातार अपनी स्थिति मजबूत की, और यही वजह रही कि वह यहां से अजेय ही रहीं. 2001 के बाद 2006, 2011 और 2016 के विधानसभा चुनाव में वह कांग्रेस के टिकट पर जीत हासिल करती रहीं. साल 2011 वाली की जीत उनके लिए बेहद खास रही थी क्योंकि उन्होंने 46,000 से अधिक वोटों के भारी अंतर से जीत हासिल की थी.

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लेकिन साल 2021 के विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले 2020 में अजंता ने कांग्रेस से किनारा कर लिया और बीजेपी का दामन थाम लिया. उनके इस फैसले ने असम के राजनीतिक समीकरणों को ही पूरी तरह से बदल दिया. हालांकि पार्टी बदलने के बावजूद, मतदाताओं के बीच उनकी लोकप्रियता बनी रही और 2021 के चुनाव में बड़ी जीत हासिल करके अपनी जीत का पंजा लगाया. 2026 में भी उन्होंने यहां से अपनी छठी जीत हासिल की है.