ममता बनर्जी के गढ़ में मचा सियासी भूचाल: चुनावी हार के बाद इस्तीफों की झड़ी, करीबी अफसरों और सलाहकारों ने छोड़ा साथ
अनादि न्यूज़ डॉट कॉम : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी के हाथों ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी को करारी शिकस्त मिली है। हालांकि निवर्तमान मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की अध्यक्ष ममता बनर्जी ने बीजेपी और चुनाव आयोग पर वोट चोरी का आरोप लगाते हिए इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है। वहीं इसके उलट ममता बनर्जी के किले में भगदड़ मची हुई है। बंगाल चुनाव में टीएमसी की हार के तुरंत बाद ही ममता बनर्जी के करीबी अधिकारी और सलाहकार अपने पदों से इस्तीफा दे रहें हैं। एक-एक कर कई अहम लोगों ने इस्तीफा सौंप भी दिया है।
टीएमसी की सत्ता जाते ही ममता बनर्जी के मुख्य सलाहकार अलापन बंद्योपाध्याय, अर्थशास्त्री अभिरूप सरकार और एडवोकेट जनरल समेत कई करीबियों ने इस्तीफा दे दिया है। जानिए सत्ता जाते ही कैसे ढह गया ‘दीदी’ का मजबूत इकोसिस्टमः-
ममता बनर्जी के मुख्य सलाहकार अलापन बंद्योपाध्याय ने दिया इस्तीफा
ममता बनर्जी के सबसे वफादार माने जाने वाले पूर्व मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री के मुख्य सलाहकार अलापन बंद्योपाध्याय ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। अलापन बंद्योपाध्याय ने अपना इस्तीफा चुनाव परिणाम आने के दूसरे दिन (5 मई) को ही दे दिया था। यह इस्तीफा सबसे ज्यादा चौंकाने वाला है क्योंकि 2021 में ‘यास’ तूफान के बाद हुए विवाद में ममता ने अलापन को बचाने के लिए केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री तक से सीधा टकराव मोल ले लिया था। अलापन को ममता बनर्जी की प्रशासनिक ‘आंख और कान’ माना जाता था। रिटायरमेंट के बाद ममता बनर्जी ने उन्हें अपना मुख्य सलाहकार नियुक्त कर दिया था।
अर्थशास्त्री अभिरूप सरकार: ‘नैतिकता’ का हवाला देकर छोड़ा पद
प्रसिद्ध अर्थशास्त्री और पश्चिम बंगाल औद्योगिक विकास निगम (WBIDC) के अध्यक्ष अभिरूप सरकार ने भी अपना इस्तीफा दे दिया है। अभिरूप सरकार ममता बनर्जी की आर्थिक नीतियों के मुख्य वास्तुकार रहे हैं। अर्थशास्त्री अभिरूप सरकार ने इस्तीफे के बाद कहा कि वे पश्चिम बंगाल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फाइनेंस कॉर्पोरेशन (डब्ल्यूबीआईडीसी) और पश्चिम बंगाल स्मॉल इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (डब्ल्यूबीएसआईडीसी) के अध्यक्ष थे।मंगलवार को ही संबंधित विभागों के सचिवों को अपना इस्तीफा सौंप दिया। उन्होंने साफ कहा कि मैं कोई राजनीतिक व्यक्ति नहीं हूं, लेकिन मेरी नियुक्ति राजनीतिक थी। मुझे तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नियुक्त किया था। अब जब वह चुनाव हार गई हैं, तो मेरे पास पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
एडवोकेट जनरल किशोर दत्ता का इस्तीफा
राज्य सरकार के सबसे बड़े वकील और एडवोकेट जनरल किशोर दत्ता ने अपना इस्तीफा दे दिया है। किशोर दत्ता ने राजभवन जाकर अपना इस्तीफा सौंपा। ममता बनर्जी की सरकार को अदालती लड़ाइयों (विशेषकर शिक्षक भर्ती घोटाले और चुनावी हिंसा के मामलों) में बचाने का जिम्मा इन्हीं के कंधों पर था।
एडवोकेट जनरल किशोर दत्ता ने भी दिया इस्तीफा
इस बीच राज्य के एडवोकेट जनरल किशोर दत्ता ने भी पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आरएन रवि को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। किशोर दत्ता दिसंबर 2023 से इस पद पर थे और इससे पहले 2017 से 2021 तक भी एडवोकेट जनरल रह चुके हैं।
पत्रकार और मीडिया सलाहकार ने भी दिया इस्तीफा
इन अधिकाकियों के अलावा सीएम ममता बनर्जी के मीडिया सलाहकार और पूर्व पत्रकार ने भी इस्तीफा दे दिया है। ममता बनर्जी के करीब रहने वाले कई वरिष्ठ पत्रकारों और मीडिया सलाहकारों ने भी अपने पदों से किनारा कर लिया है। इनमें वे लोग शामिल हैं जिन्हें सरकार ने विभिन्न अकादमियों और निगमों में महत्वपूर्ण पद दिए थे।
बीजेपी की भगवा सुनामी के सामने टीएमसी का तिनका-तिनका बिखड़ा
बता दें कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी यानी बीजेपी ने प्रचंड बहुमत हासिल किया है। 294 सदस्यीय विधानसभा में बीजेपी ने 207 सीटों पर जीत दर्ज की है। इस शानदार जीत के साथ ही बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का लगातार 15 वर्षों से चला आ रहा शासन समाप्त हो गया है। बीजपी की भगवा सुनामी के सामने भवानीपुर विधानसभा सीट से खड़ी सीएम ममता बनरर्जी को भी हार का मुंह देखना पड़ा है।






